न आरजू है न तमन्ना है कोई।
अब इस दिल को दिल मिल गया कोई॥
इंतज़ार था सदियों का मेरे जीवन में।
उसे एक झटके में पूरा कर गया कोई॥
अक्सर सोचता रहता था मैं तन्हाई में।
मैं तन्हा क्यों हूँ, मुझे आज तक क्यों नही मिला कोई॥
वो क्या आई ज़िन्दगी में फूल खिल गए लाखों।
सूखे बाग़ में एक प्यार का पौधा लगा गया कोई॥
अब अगर ये सपना है तो ये सदा रहे मेरा।
जो भी हो पर प्यार का मुझे खाब दिखा गया कोई॥
आज इस दिल की धडकनों को धड़कना सिखा गया कोई॥
मेरी आंखों में मोहब्बत के प्यारे ख्वाब सज़ा गया कोई॥
ख्वाब लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
ख्वाब लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
रविवार, जुलाई 26, 2009
अब न आरजू है, न तमन्ना है कोई...
लेबल: आरजू, ख्वाब, तमन्ना, मोहब्बत
Writer रामकृष्ण गौतम पर रविवार, जुलाई 26, 2009 6 Responzes
बुधवार, जून 10, 2009
उदासी के मंज़र...

उदासी के मंज़र मकानों में हैं
के रंगीनियाँ अब दुकानों में हैं।
मोहब्बत को मौसम ने आवाज़ दी
दिलों की पतंगें उड़ानों में हैं।
इन्हें अपने अंजाम का डर नहीं
कई चाहतें इम्तहानों में हैं।
न जाने किसे और छलनी करेंगें
कई तीर उनकी कमानों में हैं।
दिलों की जुदाई के नग़मे सभी
अधूरी पड़ी दास्तानों में हैं।
वहाँ जब गई रोशनी डर गई
वो वीरानियाँ आशियानों में हैं।
ज़ुबाँ वाले कुछ भी समझते नहीं
वो दुख दर्द जो बेज़ुबानों में हैं।
परिंदों की परवाज़ कायम रहे
कई ख़्वाब शामिल उड़ानों में हैं।
लेबल: इम्तिहानो, उड़ान, उदासी, ख्वाब, बेजुबान, मकानों, मोहब्बत, वीरानिया
Writer रामकृष्ण गौतम पर बुधवार, जून 10, 2009 3 Responzes
सदस्यता लें
संदेश (Atom)









